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बाजार गए हुए थे माता-पिता, तो छत से कूदकर 15 साल के लड़के ने कर ली सुसाइड

15 साल के लड़के के छठी मंजिल से कूदकर आत्महत्या करने का मामला सामने आया है. घटना के समय लड़के के माता-पिता मयूर विहार बाजार गए हुए थे. लड़के को पड़ोसियों द्वारा मैक्स अस्पताल ले जाया गया जहां उसने दम तोड़ दिया.


2020 में आत्महत्या से 11,396 बच्चों (18 वर्ष से कम) की मौत हुई है, जिसमें प्रतिदिन औसतन 31 नाबालिगों की मौतें हुई हैं. ये आंकड़े अपने आप में दहशत फैलाने के लिए काफी हैं. इतनी छोटी सी उम्र में इतना बड़ा कदम उठा लेना वाकई में हैरान कर देता है.

छठी मंजिल से कूदकर ली खुद की जान

राष्ट्रीय राजधानी में एक 15 वर्षीय लड़के ने अपने घर की छठी मंजिल से कूदकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली. एक पुलिस अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी. पुलिस के मुताबिक घटना पूर्वी दिल्ली के कॉमनवेल्थ गेम्स गांव (Commonwealth Games Village) में शनिवार को रात करीब 8:30 बजे हुई. घटना के समय लड़का अपने घर पर अकेला था. उसके माता-पिता मयूर विहार बाजार गए हुए थे.

मैक्स अस्पताल में तोड़ा दम

पुलिस अधिकारी ने कहा, 'उसे उनके पड़ोसियों द्वारा मैक्स अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया.' आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जिस जगह पर लड़का गिरा था, उस जगह का अपराध और फॉरेंसिक टीमों (Forensic Teams) द्वारा गहन निरीक्षण किया गया. अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि किशोर ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया. अधिकारी ने कहा, 'अभी तक किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका नहीं है. पुलिस सभी ऐंगल्स से घटना की जांच कर रही है.

क्या कहते हैं आत्महत्या के आंकड़े ?

केंद्र सरकार द्वारा 14 दिसंबर को संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2020 में आत्महत्या से 11,396 बच्चों (18 वर्ष से कम) की मौत हुई है, जिसमें प्रतिदिन औसतन 31 नाबालिग की मौतें हुई हैं. गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा था कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले तीन सालों के दौरान बच्चों (18 वर्ष से कम) द्वारा की गई आत्महत्याओं की कुल संख्या 2018 में 9,431, 2019 में 9,613 और 2020 में 11,396 थी.

कोविड के बाद मानसिक स्वास्थ्य पर जारी की पहल

वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने कोविड-19 के प्रकोप और उसके बाद मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण के लिए छात्रों, शिक्षकों और परिवारों को मनो-सामाजिक सहायता प्रदान करने के लिए गतिविधियों को कवर करते हुए एक सक्रिय पहल 'मनोदर्पण' शुरू की है.

NCERT ने भी की मदद

शिक्षा मंत्रालय के अलावा, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने देश भर के स्कूली छात्रों को उनकी चिंताओं को साझा करने में मदद करने के लिए अप्रैल 2020 में 'स्कूली बच्चों के लिए एनसीईआरटी परामर्श सेवाएं' शुरू की हैं. यह सेवा देश के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 270 परामर्शदाताओं (Consultants) द्वारा नि:शुल्क प्रदान की जाती है.

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