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युवती ने कहा, 12 लोगों ने रेप किया; कोर्ट ने उसे ही झूठा करार दे दिया, पर अब आया मोड़

 साइप्रस सुप्रीम कोर्ट ने ब्रिटेन की एक युवती की सजा पर रोक लगा दी है. युवती पर वहां की एक कोर्ट ने रेप का झूठा आरोप लगाने की बात कहते हुए 4 महीने की सजा सुनाई थी.


यहां की सुप्रीम कोर्ट ने 21 वर्षीय ब्रिटिश युवती के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सजा पर रोक लगा दी है. इससे पहले निचली अदालत ने युवती को झूठ बोलने का दोषी पाते हुए 4 महीने की सजा सुनाई थी. वहीं, युवती का आरोप था कि उसके साथ गैंप रेप की घटना हुई थी, लेकिन निचली अदालत ने बयान, सबूतों को दरकिनार करते हुए युवती को सजा सुनाई थी. वहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बाहर युवती के समर्थकों ने खुशी जताते हुए जोरदार नारेबाजी की.

2019 में लगाया था रेप का आरोप

बता दें कि युवती ने साल 2019 में अइया नापा पुलिस को बताया था कि उसके साथ गैंप रेप हुआ है. इसके बाद साल 2020 के जनवरी में कोर्ट में ट्रायल के दौरान युवती और उसके लीगल टीम को बोलने नहीं दिया गया और न ही सबूत पेश करने का मौका दिया गया. वहीं, उसे पब्लिकली शरारत करने का दोषी माना गया. 

युवती की मां ने कहा बेटी को पूरा इंसाफ मिलना बाकी

वहीं, साइप्रस में कोर्ट ऑफ अपील के ऐतिहासिक फैसले के बाद युवती की मां ने कहा कि यह एक बड़ी राहत की बात है. साइप्रस के अधिकारियों ने अपनी कानूनी प्रक्रिया में खामियों को पहचाना है. हालांकि, यह निर्णय पुलिस, जज, या अधिकारियों द्वारा उसके साथ किए गए बर्ताव को माफ नहीं करता है, लेकिन आशा है कि अपराध की पीड़ित मेरी बेटी, जिस पीड़ा से गुजरी है, उसे कम किया जा सकेगा.  मेरी बेटी को पूरा इंसाफ तभी मिलेगा, जब वहां की अथॉरिटी साइप्रस में इकट्ठे किए गए सबूतों पर संज्ञान लेगी. 

समर्थक हुए कोर्ट के बाहर इकट्ठा

 वहीं, सजा को पलटने की खबर मिलते ही ठंड के बावजूद निकोसिया में अदालत के बाहर युवती के समर्थक एकत्रित हो गए. यहां उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए ताली बजाई और कहा कि दोषियों को सजा दो. कुछ लोगों के हाथ में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर लिखा था "बलात्कार संस्कृति खत्म करो" और हमें युवती पर भरोसा है.

वकीलों ने कहा अब रेप की जांच करे पुलिस

कोर्ट के फैसले के  बाद पीड़ित के वकील ने कहा कि हम मांग कर रहे हैं कि एक अलग पुलिस टीम बनाई जाए, जो रेप की जांच करे.  हम अभी आधिकारिक अनुवाद की प्रति का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कार्यवाही के दौरान कोर्ट हमारे तर्कों से सहमत थी. कोर्ट ने माना कि युवती को निष्पक्ष सुनवाई से वंचित रखा गया और पूरी प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया था. उनके एक अन्य वकील ने कहा कि  यह बहुत खुशी की बात है. युवती को आखिरकार वह न्याय मिला, जिसकी वह हकदार थी. आशा करते हैं कि इस निर्णय का यौन उत्पीड़न के अन्य पीड़ितों के मामलों  पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा. इस निर्णय के लिए साइप्रस सुप्रीम कोर्ट की सराहना करते हैं.

वारदात के वक्त 19 साल की थी युवती

बता दें कि पीड़ित ब्रिटेन के डर्बीशायर की रहने वाली है. जब वह सिर्फ 19 वर्ष की थी, अइया नपा में 12 पुरुषों के एक ग्रुप ने उस पर हमला किया था. इसके बाद झूठ बोलने का दोषी पाए जाने से पहले उसे तीन महीने तक हिरासत में रखा गया और 2020 में 4 महीने की जेल की सजा दी गई. उसे लगभग 6 महीने बाद साइप्रस छोड़ने की अनुमति मिली थी.  पीड़ित जुलाई में छुट्टी बिताने के लिए साइप्रस गई हुईं थी. वहीं, उसकी 21 वर्षीय इज़राइली फुटबॉलर शिमोन युसुफोव से मुलाकात हुई और डेटिंग शुरू हुई. जुलाई की एक रात वह फुटबॉलर के साथ होटल के कमरे में गई, तब युवती ने दावा किया था कि फुटबॉलर के दोस्तों के एक ग्रुप ने उसके साथ रेप किया.  इसके बाद पीड़ित ने पुलिस को सूचना दी और 12 इज़राइलियों को गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ के दौरान सभी ने यह कहा कि युवती के सहमति से सब हुआ है.

पुलिस ने युवती को दिया था झूठा करार

घटना में उस समय मोड़ आया, जब पुलिस ने 8 घंटों तक युवती से पूछताछ की और वकील की मांग किए जाने के बावजूद उपलब्ध नहीं कराया गया. पुलिस द्वारा युवती को झूठा करार दे दिया गया और उससे अपनी बनाई हुई कहानी को वापस लेने के लिए एक बयान जारी किया गया और उस पर युवती से हस्ताक्षर कराए गए. वहीं, कोर्ट में कानूनी प्रक्रिया के बाद उसे पब्लिक शरारत का दोषी करार दिया गया. इस मामले में युवती के वकीलों का कहना है कि इस दौरान उसके मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ था.

सुप्रीम कोर्ट ने भी माना युवती के साथ हुआ गलत

वहीं, सुप्रीम कोर्ट में अपील के दौरान इस बात पर ध्यान दिया गया कि मुकदमे की कार्यवाही में वापसी के बयान को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था. युवती को पुलिस स्टेशन में कई घंटे तक बिना वकील और ट्रांसलेटर के रखा गया था. कोर्ट के फैसले के बाद युवती के वकील ने कहा कि  यह एक महत्वपूर्ण पल है, न केवल हमारे मुवक्किल के लिए, जिसने हमेशा अपनी बेगुनाही को साबित करने के लिए संघर्ष किया. जबकि, ऐसा करने के दौरान उसे घर नहीं लौटने जैसी कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा. हमने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि हमारे मुवक्किल पर निष्पक्ष सुनवाई नहीं हुई और आज साइप्रस सुप्रीम कोर्ट इस बात से सहमत हो गया है.

वकीलों ने जताई खुशी

वकील ने कहा कि खुशी है कि हमारी टीम बाधाओं के बावजूद इस निर्णय को हासिल कर पाई. आशा करते हैं कि साइप्रस में ऐसा कुछ दोबारा न हो. अंत में यूनाइटेड किंगडम, इज़राइल और दुनिया भर के समर्थकों को धन्यवाद देना चाहते हैं. इज़राइल में भी इस फैसले ने न सिर्फ सुर्खियां बटोरीं, बल्कि वहां की मीडिया ने फैसले का स्वागत भी किया. वहीं, आरोपियों को वकील का कहना है कि कोर्ट के इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि मेरे मुवक्किल ने शिकायतकर्ता के खिलाफ कोई अपराध किया है.

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